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रोशनबाद / हरिद्वार जिला प्रसाशन के निकट आस पास के ग्रामीण क्षेत्रों मे बिना स्वीकृत प्रस्ताव और विभागीय अनुमति के विद्युत ढांचे में लगातार बदलाव किये जा रहे है , ओर ये कार्य पिछले लगभग पांच वर्षों से कथित अनियमितताओं के चलते बड़े स्तर पर किया जा रहा है,
उत्तराखंड जिला हरिद्वार के रोशनाबाद-सिडकुल क्षेत्र में बिजली विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।बता दें की क्षेत्र में तैनात कुछ लाइनमैन द्वारा बिना निर्धारित अनुमति और स्वीकृत प्रस्ताव के बिजली की लाइनों को शिफ्ट करने तथा सरकारी खंभों को तोड़ फोड़कर क्षतिग्रस्त करके दूसरी जगह नये खम्बे स्थानांतरित करने जैसे कार्य किए जा रहे हैं। ओर ये कोई आरोप नही है बल्कि इनके पुरे प्रमाण भी है जिन्हे जल्दी ही उच्चाधिकारियों के साथ साथ मुख्यमंत्री दरबार तक पहुँचाने की तैयारी भी है,
बता दें की यह न केवल विभागीय नियमों की अनदेखी का मामला होगा, बल्कि सरकारी राजस्व को संभावित नुकसान और विद्युत सुरक्षा से जुड़ी गंभीर चिंताओं को भी जन्म दे चूका है,
रोशनाबाद सूर्य विहार से ग्राम हेत्तमपुर तक कथित अनियमिततायें धड़ल्ले से चल रही है,
जिनमे मुख्य रूप से रोशनाबाद-सिडकुल क्षेत्र के आसपास स्थित सूर्य विहार कॉलोनी, ग्राम रोशनाबाद और हेत्तमपुर की एलप्स कॉलोनी सहित अन्य स्थानों पर बिजली के खंभों और लाइनों की शिफ्टिंग को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। कहीं बिजली की लाइन को स्थानांतरित किया जा रहा है, तो कहीं खंभों को तोड़कर उनके स्थान पर नये खम्बो को दूसरी जगह शिफ्ट कर दिया गया है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इन कार्यों के लिए नियमानुसार प्रस्ताव तैयार किए गए है?.सक्षम अधिकारियों से स्वीकृति ली गई?.और निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया गया?
यदि बिना स्वीकृति विद्युत ढांचे में बदलाव किए जा रहे हैं, तो इसकी जिम्मेदारी तय करना आवश्यक है।
अब सवाल ये भी है की इन लाइन मैनो द्वारा क्या सरकारी राजस्व को भाई हानि नही पहुंचाई जा रही? ओर इसकी जाँच कब कैसे ओर कौन करेगा?
पिछले करीब पांच वर्षों से इस क्षेत्र में बिजली के खंभों को क्षतिग्रस्त करने, उनके स्थान पर नये खम्बे मांगवाने और लाइनों की शिफ्टिंग को लेकर सरकार की आँखों मे धूल झोंक कथित अनियमितताएं जारी हैं। हालांकि, इनकी स्वतंत्र पुष्टि और विभागीय रिकॉर्ड की जांच होना भी आवश्यक है।
सवाल यह भी है कि यदि कार्य विभागीय प्रक्रिया के तहत किए जाने चाहिए, तो क्या प्रत्येक कार्य का प्रस्ताव, अनुमानित लागत, स्वीकृति और खर्च का रिकॉर्ड उपलब्ध है? क्या संबंधित अधिकारियों को इन कार्यों की जानकारी है? यदि जानकारी है, तो अब तक इनकी जांच क्यों नहीं हुई और यदि जानकारी नहीं है, तो विभागीय निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
मामले की निष्पक्ष जांच से ही स्पष्ट हो सकेगा कि सरकारी राजस्व को वास्तव में कितना नुकसान हुआ है और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।
