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उत्तराखंड विशेष / रानीपुर विधानसभा क्षेत्र की राजनीति में उस समय जबरदस्त हलचल मच गई, जब मनोज धनगर अपने समर्थकों के भारी दल-बल के साथ कांग्रेस का दामन थामते नजर आए। उनके इस कदम ने 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले ही क्षेत्र का राजनीतिक पारा चढ़ा दिया है। माना जा रहा है कि रानीपुर की सियासत में इस बार कुछ बड़ा होने वाला है।
क्षेत्र में इन दिनों मनोज धनगर के नाम की लहर साफ महसूस की जा रही है। जिस तरह से वे लगातार जनसम्पर्क, बैठकों और युवा संवाद कार्यक्रमों के जरिए जनता के बीच सक्रिय हैं, उससे यह संकेत मिल रहा है कि वे पूरी तैयारी के साथ चुनावी मैदान में उतरने का मन बना चुके हैं। उनके साथ उमड़ रही भीड़ इस बात का प्रमाण है कि रानीपुर में बदलाव की बयार बहने लगी है।
केवल आम जनता ही नहीं, बल्कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं का भी उन्हें खुला समर्थन मिलता दिख रहा है। पार्टी संगठन के भीतर उन्हें एक मजबूत और प्रभावशाली चेहरे के रूप में देखा जा रहा है, जो इस सीट पर कांग्रेस के लिए “ब्रह्मास्त्र” साबित हो सकते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यही रफ्तार बनी रही तो 2027 में रानीपुर विधानसभा का मुकाबला बेहद दिलचस्प और निर्णायक होगा।
सबसे खास बात यह है कि क्षेत्र के पढ़े-लिखे और जागरूक युवाओं ने कमान संभाल ली है। युवा वर्ग कंधे से कंधा मिलाकर मनोज धनगर के साथ खड़ा नजर आ रहा है। सोशल मीडिया से लेकर जमीनी स्तर तक अभियान को धार दी जा रही है। युवाओं की यह एकजुटता आने वाले चुनाव में बड़ा असर डाल सकती है।
रानीपुर की जनता भी अब खुले तौर पर बदलाव की बात कर रही है। विकास, रोजगार और पारदर्शी नेतृत्व की मांग के बीच मनोज धनगर एक नए विकल्प के रूप में उभर रहे हैं। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि रानीपुर की यह सियासी लहर किस दिशा में जाती है, लेकिन फिलहाल इतना तय है कि 2027 से पहले ही रानीपुर विधानसभा की राजनीति पूरी तरह गरमा चुकी है।
