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देवभूमि पर बाहरी राज्यों के स्पा माफियाओं की नजर! धर्म नगरी हरिद्वार में स्पा की आड़ में फैलता कथित देह व्यापार बना चिंता का विषय.. संचालक ओर नेटवर्क से जुड़े अधिकतर तथाकथित हरियाणा व उत्तरप्रदेश के निवासी,

ByManish Kumar Pal

Jun 4, 2026

NEWS NATIONAL

हरिद्वार। विश्वभर में अपनी धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान के लिए प्रसिद्ध धर्म नगरी हरिद्वार आज एक ऐसे खतरे का सामना कर रही है, जो आने वाले समय में इसकी मूल पहचान और सामाजिक संरचना के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है। शहर और उसके आसपास तेजी से खुल रहे स्पा एवं मसाज सेंटरों को लेकर स्थानीय लोगों के बीच कई प्रकार की चर्चाएं और आशंकाएं लगातार बढ़ रही हैं।
बताया जा रहा है कि हरियाणा और उत्तर प्रदेश से जुड़े कई कारोबारी उत्तराखंड में स्पा व्यवसाय के नाम पर अपने नेटवर्क का विस्तार कर रहे हैं। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर देवभूमि ही ऐसे कारोबारियों की पहली पसंद क्यों बन रही है? क्या इसकी धार्मिक पहचान, शांत वातावरण और प्रशासनिक ढांचे की कुछ कमजोरियों का फायदा उठाया जा रहा है?
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि कुछ स्थानों पर तथाकथित “क्रॉस मसाज” के नाम पर ऐसे कार्य संचालित किए जा रहे हैं, जिनकी वैधता और नैतिकता दोनों पर प्रश्नचिह्न खड़े होते हैं। यदि किसी गतिविधि को कानून स्पष्ट रूप से अनुमति नहीं देता, तो फिर वह खुलेआम कैसे संचालित हो रही है? यह ऐसा सवाल है जिसका जवाब समाज और प्रशासन दोनों को तलाशना होगा।
चिंता का विषय केवल कथित अनैतिक गतिविधियां ही नहीं हैं, बल्कि ऐसे भी आरोप सामने आते रहे हैं कि कुछ स्पा संचालक ग्राहकों को ब्लैकमेल करने, उनसे अवैध वसूली करने, झूठे मामलों में फंसाने या अन्य प्रकार के दबाव बनाने जैसे गंभीर अपराधों में भी संलिप्त पाए गए हैं। यदि इन आरोपों में सच्चाई है, तो यह केवल कानून व्यवस्था का ही नहीं बल्कि समाज की सुरक्षा का भी प्रश्न है।

दुर्भाग्य ये हैं की पवित्र नगरी कों आज ये स्पा संचालक बेखौफ होकर कलंकित कर रहे हैं सूत्रों द्वारा मिली जानकारी मे शहर के हर मॉल मे धड़ल्ले से जिश्म फरोशी का कारोबार चल रहा हैं, रुड़की आर आर सिनेमा हो या रुड़की शहर पूरा स्पा माफियाओं की चपेट मे आ चूका हैं जहाँ सिर्फ ओर सिर्फ क्रॉस मसास ही चल रही हैं ओर फिर इसकी आड़ मे एक्स्ट्रा सर्विस.. ओर ब्लेकमेलिंग,

सबसे बड़ा सवाल यह है कि धर्म और संस्कृति की रक्षा के बड़े-बड़े दावे करने वाले संगठन, सामाजिक संस्थाएं और स्वयंभू धर्मरक्षक इस मुद्दे पर आखिर खामोश क्यों हैं? क्या देवभूमि की पहचान को प्रभावित करने वाले ऐसे मामलों पर बोलना किसी की प्राथमिकता नहीं रह गया है?
आज भले ही यह समस्या सीमित दिखाई दे रही हो, लेकिन यदि समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई तो आने वाले वर्षों में इसका असर हरिद्वार की सामाजिक व्यवस्था, युवा पीढ़ी और धार्मिक छवि पर गहरा पड़ सकता है।
हरिद्वार केवल एक शहर नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। ऐसे में आवश्यकता है कि प्रशासन, जनप्रतिनिधि, सामाजिक संगठन और आम नागरिक मिलकर यह सुनिश्चित करें कि देवभूमि की गरिमा और पहचान किसी भी कीमत पर प्रभावित न होने पाए।
अब सवाल यह नहीं कि यह सब हो रहा है या नहीं, बल्कि सवाल यह है कि यदि हो रहा है तो इसे रोकने की जिम्मेदारी कौन निभाएगा?

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