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रोशनाबाद। जिला मुख्यालय और प्रशासनिक भवन से महज़ कुछ दूरी पर फैला अतिक्रमण अब आम जनता के लिए गंभीर परेशानी और प्रशासन के लिए चुनौती बनता जा रहा है। ग्राम रोशनाबाद, नवोदय नगर, सिडकुल औद्योगिक क्षेत्र, महिंद्रा चौक, केल्विन केयर चौक, पाल मार्केट, रोशनाबाद स्टेडियम और सरकारी स्कूल के आसपास की सड़कें दिन प्रतिदिन अतिक्रमण की गिरफ्त में आती जा रही हैं।
हालात ऐसे हैं कि सड़कें अब वाहनों के लिए कम और ठेलियों, अस्थायी दुकानों, तंबुओं, बांस-बल्लियों तथा अवैध पार्किंग के लिए अधिक दिखाई देती हैं। गांव और मोहल्लों की गलियों से लेकर मुख्य मार्गों तक सब्जी विक्रेताओं और अन्य अस्थायी दुकानदारों ने सड़क के बड़े हिस्से पर कब्जा जमा रखा है, जबकि घरों के सामने खड़े वाहन समस्या को और विकराल बना रहे हैं।
हर शाम जाम में कैद हो जाती हैं सड़कें.. राहगीरों के छूट जाते है पसीने
स्थानीय लोगों के अनुसार प्रतिदिन शाम 5 बजे से रात 8 बजे तक पूरा क्षेत्र भारी जाम की चपेट में आ जाता है। वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं और राहगीरों को निकलना तक मुश्किल हो जाता है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि आपातकालीन परिस्थितियों में एम्बुलेंस तक इस जाम में घंटों फंसी रहती है। यदि किसी बड़े हादसे की स्थिति उत्पन्न हो जाए तो अग्निशमन वाहन का समय पर घटनास्थल तक पहुंच पाना भी लगभग असंभव माना जा रहा है।
15 वर्षों से बढ़ रहा अतिक्रमण, कई बार चला अभियान, बावजूद इसके नही सुधर रहे अतिक्रमणकारी… आखिर क्यों है हौसले इतने बुलंद,
बताया जाता है कि पिछले लगभग 15 वर्षों में इस क्षेत्र में अतिक्रमण लगातार बढ़ता गया है। प्रशासन द्वारा पूर्व में चार से पांच बार बड़े स्तर पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई, लेकिन कुछ समय बाद फिर वही स्थिति पैदा हो गई। आज हालात पहले से अधिक गंभीर दिखाई दे रहे हैं।
जाम और अव्यवस्था के कारण आए दिन वाहन चालकों, दुकानदारों और राहगीरों के बीच कहासुनी और विवाद की घटनाएं सामने आती रहती हैं। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि सड़कों पर कब्जा जमाने वाले कुछ लोगों की मनमानी और दबंगई के कारण आम लोगों को रोजाना परेशानी झेलनी पड़ रही है।
आखिर मंगलवार और शनिवार को हालात हो जाते हैं इतने बेकाबू
क्षेत्रवासियों का कहना है कि मंगलवार और शनिवार को स्थिति और भी भयावह हो जाती है। इन दिनों सड़कों पर ही पीठ बाजार सज जाता है, जिससे मुख्य मार्ग पूरी तरह संकरा हो जाता है और यातायात व्यवस्था चरमरा जाती है। कई बार वाहन चालक घंटों तक जाम में फंसे रहने को मजबूर हो जाते हैं।
जनता का सवाल – आखिर कब जागेगा प्रशासन?
प्रशासनिक भवन के बिल्कुल नजदीक स्थित इस क्षेत्र की बदहाल यातायात व्यवस्था और बढ़ते अतिक्रमण को लेकर स्थानीय लोगों ओर राहगीरों में गहरा आक्रोश दिखाई देता है। लोगों का कहना है कि जब जिला प्रशासन के कार्यालय के आसपास ही सड़कें अतिक्रमण से मुक्त नहीं हैं, तो अन्य क्षेत्रों की स्थिति का सहज अनुमान आसानी से लगाया जा सकता है।
क्षेत्रवासियों का कहना हैं कि प्रशासन केवल औपचारिक कार्रवाई तक सीमित न रहे, बल्कि स्थायी समाधान के लिए प्रभावी योजना बनाकर अतिक्रमण, अवैध पार्किंग और सड़कों पर लगने वाले अस्थायी बाजारों पर कठोर कार्रवाई करे, ताकि आम जनता को रोजाना की इस परेशानी से राहत मिल सके और किसी बड़े हादसे से पहले व्यवस्था को पटरी पर लाया जा सके।
