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रोशनाबाद, नवोदय नगर और हेत्तमपुर क्षेत्र से होकर गुजरने वाली नदियों में एक बार फिर कथित अवैध खनन को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय स्तर पर आरोप है कि रात के अंधेरे का फायदा उठाकर खनन माफियाओं द्वारा नदी क्षेत्र से बड़े पैमाने पर उपखनिज निकाला जा रहा है। यदि ये आरोप सही हैं तो इससे न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंचने की आशंका है, बल्कि सरकार के राजस्व को भी भारी क्षति हो सकती है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि रोशनाबाद स्थित प्रशासनिक भवन से कुछ ही दूरी पर यदि रात के समय अवैध खनन और उपखनिज की निकासी हो रही है, तो संबंधित विभागों की निगरानी व्यवस्था आखिर कितनी प्रभावी है?
स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में रात के समय खनन से जुड़े वाहनों की आवाजाही और गतिविधियां दिखाई देती हैं। लोगों के बीच यह चर्चा भी है कि लंबे समय से चल रहे इस कथित खेल पर प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हो पा रही है,
खनन विभाग की भूमिका पर उठ रहे सवाल
खनन विभाग की जिम्मेदारी अवैध खनन पर निगरानी और नियमानुसार कार्रवाई करना है। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि यदि क्षेत्र में वास्तव में बिना अनुमति खनन हो रहा है तो अब तक जिम्मेदार लोगों और वाहनों के खिलाफ ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
क्या विभाग को इसकी जानकारी नहीं है?
क्या रात में होने वाली गतिविधियों की निगरानी नहीं हो रही?
या फिर शिकायतों के बावजूद कार्रवाई में देरी क्यों हो रही है?
सरकारी राजस्व को नुकसान का अंदेशा
अवैध रूप से उपखनिज निकाले जाने की स्थिति में सरकार को रॉयल्टी और अन्य राजस्व की क्षति हो सकती है। हालांकि वास्तविक नुकसान कितना हुआ है, इसका पता विभागीय जांच और रिकॉर्ड की जांच के बाद ही चल सकता है।स्थानीय लोगों की मांग है कि संबंधित अधिकारी मौके का निरीक्षण करें, रात के समय निगरानी बढ़ाएं और यदि अवैध खनन पाया जाता है तो नियमानुसार तत्काल कार्रवाई की जाए।
अब देखना यह है कि खनन विभाग और प्रशासन इन गंभीर आरोपों का संज्ञान लेते हैं या फिर रोशनाबाद की नदियों में कथित खनन का यह खेल यूं ही जारी रहता है।
