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रोशनाबाद।
यह कोई दूरदराज का इलाका नहीं है। आसपास सरकारी दफ्तर हैं, प्रशासनिक गतिविधियां हैं, अधिकारियों की आवाजाही है। बावजूद इसके रोशनाबाद, नवोदय नगर और आनेकी-हेतमपुर की नदियों में रात ढलते ही कथित खनन गतिविधियों को लेकर सवाल लगातार गहराते जा रहे हैं।
सवाल सिर्फ इतना नहीं कि नदी से उपखनिज कौन निकाल रहा है?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यह सब हो कैसे रहा है?
दिन के उजाले में जिस इलाके में हर गतिविधि पर नजर रखी जा सकती है, वहीं रात के अंधेरे में नदी क्षेत्र तक वाहनों की आवाजाही और कथित खनन की गतिविधियां बढ़ने की शिकायतें सामने आना अपने आप में गंभीर विषय है।
नदी किनारे रात होते ही बदल जाता है मंजर?
स्थानीय स्तर पर सामने आ रही सूचनाओं के मुताबिक, रोशनाबाद, नवोदय नगर और आनेकी-हेतमपुर के नदी क्षेत्रों में रात के समय खनन से जुड़ी गतिविधियों में तेजी देखे जाने की बात कही जा रही है।
अगर यह महज अफवाह है तो प्रशासन इसे स्पष्ट क्यों नहीं करता?
और अगर वास्तव में नदी क्षेत्र में खनन हो रहा है, तो फिर सवाल और भी बड़ा है—
क्या खनन की अनुमति है?
कहां तक अनुमति है?
कितनी मात्रा में अनुमति है?
और रात के समय वहां कौन-कौन से वाहन पहुंच रहे हैं?
अधिकारियों की नजर से आखिर क्या छूट रहा है?
रोशनाबाद कोई ऐसा क्षेत्र नहीं है जहां प्रशासनिक निगरानी पहुंच से बाहर हो। ऐसे में नदी क्षेत्र से लगातार शिकायतें सामने आना निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है।
क्या संबंधित विभागों के पास इन क्षेत्रों में आने-जाने वाले खनन वाहनों का रिकॉर्ड है?
क्या रात के समय नदी क्षेत्रों का निरीक्षण होता है?
क्या खनन पट्टों और वास्तविक खनन क्षेत्र का मिलान किया जाता है?
और सबसे महत्वपूर्ण—
यदि कहीं अवैध खनन पकड़ा गया है तो अब तक कितने वाहन सीज हुए, कितने चालान हुए और कितनी राजस्व वसूली हुई?
इन सवालों के जवाब सार्वजनिक होने चाहिए।
खेल नदी का है, नुकसान किसका?
नदी से नियमों के विपरीत खनिज निकालना केवल मिट्टी या पत्थर हटाने का मामला नहीं है। इसका सीधा असर नदी के स्वरूप, तटों और आसपास के क्षेत्र पर पड़ सकता है।
यदि निर्धारित सीमा से अधिक खनन होता है तो प्राकृतिक नदी तंत्र पर इसका असर पड़ने की आशंका रहती है। वहीं सरकार को मिलने वाले राजस्व पर भी सवाल उठ सकते हैं।
यानी मामला सिर्फ “खनन हुआ या नहीं हुआ” तक सीमित नहीं है।
मामला यह भी है कि यदि हुआ तो किस अनुमति के तहत हुआ, किसने किया और सरकारी रिकॉर्ड में उसका हिसाब क्या है?
अब कागजी जांच नहीं, मौके की जांच चाहिए
इस पूरे मामले में जरूरत सिर्फ फाइलों में रिपोर्ट तैयार करने की नहीं, बल्कि वास्तविक स्थिति सामने लाने की है।
रोशनाबाद, नवोदय नगर और आनेकी-हेतमपुर के संबंधित नदी क्षेत्रों का मौके पर निरीक्षण हो। रात के समय होने वाली गतिविधियों की निगरानी की जाए। खनन से जुड़े वाहनों के दस्तावेज जांचे जाएं और वैध अनुमति तथा वास्तविक खनन क्षेत्र का मिलान किया जाए।
