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रोशनाबाद / बिजली के खंभे शिफ्ट करने के नाम पर कथित वसूली का आरोप, क्या विभागीय व्यवस्था की आड़ में चल रहा है कोई खेल? उत्तराखंड के उच्च अधिकारियों से निष्पक्ष जांच की मांग
रोशनाबाद, हरिद्वार। उत्तराखंड के हरिद्वार जनपद के रोशनाबाद क्षेत्र में बिजली विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। बिजली के खंभों को शिफ्ट करने के नाम पर कथित रूप से अवैध वसूली किए जाने के आरोपों के बीच अब एक कथित बयान ने मामले को और गंभीर बना दिया है। आरोप है कि पैसे लेते समय एक लाइनमैन ने कहा, “पैसा ऊपर तक भेजना पड़ता है।”
यदि यह बयान सही संदर्भ में दिया गया है, तो इसकी निष्पक्ष जांच बेहद जरूरी है। आखिर लाइनमैन के इस कथित बयान का क्या अर्थ निकाला जाए? क्या वह किसी वरिष्ठ अधिकारी के निर्देश या हिस्सेदारी की बात कर रहा था, या फिर पैसे वसूलने के लिए अधिकारियों का नाम लेकर लोगों पर दबाव बनाया जा रहा था? फिलहाल इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही सामने आ सकता है।
‘पैसा ऊपर तक भेजना पड़ता है’—आखिर किसके लिए ओर क्यों कही गई यह बात..?
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि कोई कर्मचारी कथित तौर पर अवैध तरीके से पैसे लेते हुए यह कहता है कि रकम ऊपर तक पहुंचानी पड़ती है, तो संबंधित विभाग को इसकी गंभीरता से जांच क्यों नहीं करनी चाहिए?
क्या वास्तव में इस कथित वसूली के पीछे कोई संगठित व्यवस्था काम कर रही है? या फिर संबंधित कर्मचारी अपने स्तर पर वसूली करते हुए वरिष्ठ अधिकारियों का नाम इस्तेमाल कर रहा है?
दोनों ही स्थितियां गंभीर हैं। यदि किसी वरिष्ठ अधिकारी की संलिप्तता सामने आती है, तो उसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। वहीं, यदि कोई कर्मचारी अधिकारियों का नाम लेकर लोगों से अवैध वसूली कर रहा है, तो उसके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
हालांकि, केवल किसी कर्मचारी के कथित बयान के आधार पर वरिष्ठ अधिकारियों को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। इसके लिए स्वतंत्र जांच, संबंधित व्यक्तियों के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों की पड़ताल आवश्यक है।
खंभा शिफ्ट करने की निर्धारित प्रक्रिया, फिर कुछ दिनों में काम कैसे?
बिजली के खंभे को एक स्थान से दूसरे स्थान पर शिफ्ट करना सामान्य काम नहीं है। इसके लिए परिस्थितियों के अनुसार तकनीकी परीक्षण, विभागीय स्वीकृति, कार्यादेश और सुरक्षा संबंधी प्रक्रियाओं का पालन करना पड़ सकता है।
ऐसे में सवाल उठता है कि रोशनाबाद क्षेत्र में बिजली के खंभे शिफ्ट करने के लिए कौन-सी प्रक्रिया अपनाई जा रही है?
आरोप है कि जहां निर्धारित प्रक्रिया के तहत काम कराने में समय लग सकता है, वहीं कथित रूप से पैसे लेकर कुछ ही दिनों में खंभे शिफ्ट करने का काम कर दिया जाता है।
यदि ऐसा हो रहा है, तो विभाग को यह स्पष्ट करना चाहिए कि संबंधित कार्यों को किस अधिकारी ने स्वीकृति दी, काम किस कार्यादेश के तहत हुआ और इसके लिए निर्धारित शुल्क जमा कराया गया या नहीं।
क्या किसी कर्मचारी को विभागीय प्रक्रिया से अलग जाकर निजी तौर पर पैसे लेकर खंभे शिफ्ट करने का अधिकार है? इस सवाल का जवाब बिजली विभाग के अधिकारियों को स्पष्ट रूप से देना चाहिए।
सरकारी संपत्ति को नुकसान और विभागीय राजस्व पर भी सवाल
इससे पहले भी रोशनाबाद, हेतमपुर और सिडकुल क्षेत्र में बिजली के खंभों को शिफ्ट करने, उनके क्षतिग्रस्त होने तथा लोहे की एंगल के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठाए गए हैं।
अब कथित वसूली का आरोप सामने आने के बाद पूरे मामले की जांच और भी महत्वपूर्ण हो गई है।
यदि खंभों को बिना आवश्यक स्वीकृति के हटाया या बदला जा रहा है, तो इससे सरकारी संपत्ति और विभागीय संसाधनों को नुकसान पहुंचने की आशंका की जांच होनी चाहिए। साथ ही यह भी पता लगाया जाना चाहिए कि संबंधित कार्यों में सामग्री कहां से आई, उसका भुगतान किस मद से हुआ और काम पूरा होने का रिकॉर्ड कहां दर्ज है।
यह भी जांच का विषय है कि कहीं किसी कर्मचारी द्वारा निजी लाभ के लिए विभागीय व्यवस्था का दुरुपयोग तो नहीं किया जा रहा।..
