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रोशनाबाद – सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने से लेकर अवैध वसूली तक के आरोपों ने खड़े किए सवाल; भारी मात्रा में लोहे की एंगल मंगाने और बिजली के खंभे टूटने के मामलों की जांच की मांग
रोशनाबाद, हरिद्वार। रोशनाबाद, हेतमपुर और सिडकुल क्षेत्र में बिजली विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि विभाग के कुछ लाइनमैन कथित तौर पर विभागीय नियमों और निर्धारित प्रक्रियाओं को दरकिनार कर बिजली के खंभों को शिफ्ट करने का काम कर रहे हैं। इतना ही नहीं, इस पूरे मामले में सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचने और स्थानीय लोगों से कथित अवैध वसूली किए जाने की शिकायतें भी सामने आई हैं।
यदि ये आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला केवल विभागीय लापरवाही तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सरकारी संसाधनों के इस्तेमाल, वित्तीय पारदर्शिता और जिम्मेदार कर्मचारियों की जवाबदेही से भी जुड़ा गंभीर विषय बन सकता है।

बिना स्वीकृत प्रस्ताव के खंभे शिफ्ट करने का अधिकार किसने दिया?
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर किस विभागीय प्रस्ताव, आदेश या स्वीकृति के आधार पर क्षेत्र में बिजली के खंभों को शिफ्ट किया जा रहा है?.. लेकिन यहाँ ध्यान देने वाली बात ये भी है कि आखिर जिन खम्बो को शिफ्ट किया गया है. उन सभी को टूटा हुआ दिखाया गया है.. अब ये एक जाँच का विषय है कि खम्बे टूटे है या फिर जान बूझकर उन्हें तोड़ा गया है,
आमतौर पर बिजली के खंभों को स्थानांतरित करने के लिए संबंधित विभाग की निर्धारित प्रक्रिया, तकनीकी जांच और आवश्यक स्वीकृतियों का पालन करना होता है। ऐसे में यदि कोई कर्मचारी बिना अधिकृत अनुमति के खंभों को शिफ्ट करता है, तो उसकी जिम्मेदारी तय होना आवश्यक है।
स्थानीय स्तर पर उठ रहे सवालों के बीच बिजली विभाग के अधिकारियों को स्पष्ट करना चाहिए कि रोशनाबाद, हेतमपुर और सिडकुल क्षेत्र में खंभे शिफ्ट करने के लिए कोई आधिकारिक प्रस्ताव स्वीकृत किया गया है या नहीं। यदि प्रस्ताव स्वीकृत है, तो उसकी प्रति, कार्यादेश और संबंधित खर्च का विवरण सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
आखिर क्यों टूट रहे हैं बिजली के खंभे, क्या है पूरा मामला?
क्षेत्र में बिजली के खंभों को शिफ्ट करने के साथ उनके टूटने और भारी मात्रा में लोहे की एंगल लाए जाने को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
आखिर इन एंगल का इस्तेमाल किस कार्य के लिए किया जा रहा है? इन्हें किस विभागीय स्वीकृति के तहत मंगाया गया है? क्या इनके उपयोग और खर्च का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड मौजूद है?
यदि बिजली के खंभे क्षतिग्रस्त हो रहे हैं या उन्हें अनावश्यक रूप से बदला जा रहा है, तो यह जांच का विषय है कि इसके पीछे तकनीकी कारण हैं या निर्धारित प्रक्रिया में किसी प्रकार की अनियमितता हुई है।
हालांकि, खंभों के टूटने के वास्तविक कारणों और लोहे की एंगल की आपूर्ति के संबंध में अभी स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। विभागीय रिकॉर्ड और मौके की जांच के बिना किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।
लाइनमैन पर अवैध वसूली के आरोप, विभागीय निगरानी पर सवाल, इस पूरे मामले का सबसे गंभीर पहलू स्थानीय लोगों से कथित तौर पर धन वसूले जाने के आरोप हैं।
सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि कुछ लाइनमैन लोगों के घरों के सामने से बिजली के खंभे शिफ्ट करने के बदले कथित रूप से पैसे ले रहे हैं। यदि ऐसा हो रहा है और इसके पीछे कोई अधिकृत शुल्क या वैध विभागीय प्रक्रिया नहीं है, तो यह गंभीर अनियमितता का मामला हो सकता है।
सवाल यह है कि यदि बिजली के खंभों को शिफ्ट करने का काम विभागीय अनुमति से हो रहा है, तो उसकी निर्धारित प्रक्रिया और भुगतान का रिकॉर्ड कहां है? यदि कर्मचारी निजी तौर पर पैसे ले रहे हैं, तो विभागीय अधिकारी इसकी निगरानी क्यों नहीं कर पा रहे हैं?
इन आरोपों की निष्पक्ष जांच कर यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि किसी व्यक्ति से पैसे लिए गए हैं या नहीं, भुगतान किस मद में लिया गया और संबंधित धनराशि विभाग के खाते में जमा हुई या नहीं।
यह भी स्पष्ट करना जरूरी है कि फिलहाल कथित अवैध वसूली के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए संबंधित कर्मचारियों का पक्ष और विभागीय रिकॉर्ड सामने आना आवश्यक है।
सरकारी संपत्ति को नुकसान हुआ तो जिम्मेदारी किसकी होगी?
बिजली के खंभे और उनसे संबंधित उपकरण सार्वजनिक उपयोग की महत्वपूर्ण संपत्ति हैं। इनके स्थानांतरण, मरम्मत और प्रतिस्थापन पर होने वाला खर्च अंततः विभागीय संसाधनों से जुड़ा होता है।
यदि बिना उचित कारण या स्वीकृति के सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया है, तो यह पता लगाना जरूरी है कि इससे विभाग को कितना आर्थिक नुकसान हुआ और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।
वहीं, यदि खंभों का स्थानांतरण लोगों की वास्तविक जरूरत के आधार पर अधिकृत प्रक्रिया के तहत किया जा रहा है, तो विभाग को इसकी जानकारी और स्वीकृति से जुड़े तथ्य स्पष्ट करने चाहिए, ताकि किसी प्रकार का भ्रम न रहे।
बिजली विभाग के अधिकारियों से उठते पांच बड़े सवाल…
रोशनाबाद, हेतमपुर और सिडकुल क्षेत्र में बिजली के खंभे शिफ्ट करने के लिए कौन-सा प्रस्ताव स्वीकृत किया गया है?
क्या संबंधित कार्यों के लिए विभागीय आदेश, तकनीकी स्वीकृति और खर्च का आधिकारिक रिकॉर्ड उपलब्ध है?
क्षेत्र में भारी मात्रा में लाई जा रही लोहे की एंगल किस कार्य के लिए हैं और उनकी आपूर्ति किस आदेश के तहत की गई है?
बिजली के खंभों के टूटने या क्षतिग्रस्त होने के मामलों की जांच किस स्तर पर की गई है?
स्थानीय लोगों से कथित रूप से पैसे लिए जाने की शिकायतों की जांच कौन करेगा और दोषी पाए जाने पर क्या कार्रवाई होगी?
उच्च अधिकारियों से निष्पक्ष जांच की मांग,
मामले की गंभीरता को देखते हुए बिजली विभाग के उच्च अधिकारियों को रोशनाबाद, हेतमपुर और सिडकुल क्षेत्र में चल रहे खंभों के स्थानांतरण संबंधी कार्यों का निरीक्षण कराना चाहिए। संबंधित कार्यादेश, स्वीकृत प्रस्ताव, सामग्री की आपूर्ति, खर्च के रिकॉर्ड और स्थानीय लोगों की शिकायतों की जांच की जानी चाहिए।
यदि जांच में बिना अनुमति काम करने, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने या अवैध वसूली के आरोप प्रमाणित होते हैं, तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
साथ ही, यदि सभी कार्य निर्धारित नियमों के तहत किए जा रहे हैं, तो विभाग को दस्तावेजों के माध्यम से स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि रोशनाबाद, हेतमपुर और सिडकुल क्षेत्र में बिजली के खंभों को शिफ्ट करने का पूरा काम किसके आदेश पर हो रहा है? क्या विभागीय अधिकारी इस प्रक्रिया से पूरी तरह अवगत हैं, या वास्तव में कहीं कोई अनियमितता हो रही है? इन सवालों का जवाब जांच और आधिकारिक रिकॉर्ड से ही सामने आ सकता है।
