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खुद को समाजसेवी बताने वालों से असामाजिक तत्वों से सवाल—जब समाज की स्वच्छता की जिम्मेदारी निभाने की बात आती है, तो नालियों में पन्नी, डायपर और सब्जियों का कचरा बहाकर गंदगी क्यों फैलाई जा रही है?.. क्या किसी बड़े झगड़े कि है मंशा या फिर सामाजिकता कि आड़ मे माहौल ख़राब करने कि तैयारी?
रोशनाबाद, हरिद्वार। रोशनाबाद क्षेत्र में नालियों में घरेलू कचरा बहाने की शिकायत को लेकर काफी समय से सवाल खडे हो रहे हैं। आरोप है कि कुछ असामाजिक तत्व झगड़े कि नियत से रोशनाबाद नालियों में पन्नी, इस्तेमाल किए गए डायपर, सब्जियों के अवशेष और अन्य घरेलू कचरा भारी मात्रा में बहा रहे हैं। इससे नालियां जाम होने, गंदगी फैलने और आसपास रहने वाले लोगों के लिए परेशानी खड़ी होने की आशंका है।ये वो तलवे चाटु लोग है,जो नालियों मे जाली लगाने को गैर कानूनी ओर कचरा डाले जाने को कानूनी या वैध करार देते है, जबकि नालियों मे कचरा डालना सविधान के नियमों के खिलाफ है जिसके कारण भारी जुर्माना ओर सजा का भी प्रावधान है, लेकिन शिक्षा के आभाव मे कानून के उल्टे पन्ने पढ़ने वाले इन असामाजिक तत्वों को नालियों मे लगी जालियाँ अवैध नजर आती है,
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल उन लोगों की भूमिका को लेकर उठ रहा है, जो खुद को समाजसेवी बताते हैं। यदि कोई व्यक्ति समाजसेवा का दावा करता है, तो उससे यह अपेक्षा भी की जाती है कि वह समाज की स्वच्छता, व्यवस्था और आपसी सौहार्द बनाए रखने में योगदान देगा। ऐसे में सवाल है कि नालियों में कचरा बहाकर असुविधा पैदा करने की शिकायतें आखिर क्यों सामने आ रही हैं?.. या तो झगड़ा करने कि नियत से ऐसे असामाजिक तत्व जानबूझकर नालियों मे घरेलु कचरा डाल रहे है, या फिर इन्हे शिक्षा ओर कानून का ज्ञान नही,
समाज के लिए परेशानी खड़ी करके समाज से समर्थन की उम्मीद क्यों..?. आखिर क्यों खड़ा नही हो रहा समाज ऐसे असामाजिक तत्वों के साथ?
स्थानीय स्तर पर उठ रहे सवालों के केंद्र में एक अहम बात है—यदि किसी के कार्यों से आसपास रहने वाले लोगों को परेशानी हो रही है, तो फिर उन्हीं लोगों से सहयोग और समर्थन की अपेक्षा किस आधार पर की जा रही है?. लोग जानते है कि नालियों मे कचरा बेसुमार बहाया जा रहा है जिस कारण लोग उस कचरे से परेशान होकर अपने घरों के सामने जालियाँ इसलिए लगा रहे है जिससे उनके घरों के सामने कचरा ना बहे, ओर इन जालियों से परेशानी सिर्फ उन्ही लोगों को है जो अपने घरों का कचरा नालियों मे डाल रहे है,
आखिर कब बंद होगी नालियों में कचरा बहाने की समस्या?
नालियां घरों और गलियों से पानी की निकासी के लिए बनाई जाती हैं, न कि घरेलू कचरा, पन्नी, डायपर और सड़ने वाली सब्जियों के अवशेष बहाने के लिए। इस तरह का कचरा नालियों में जमा होने पर जल निकासी बाधित हो सकती है और दुर्गंध के साथ-साथ स्वच्छता संबंधी समस्याएं भी पैदा हो सकती हैं।.. तो फिर क्यों ये लोग नालियों मे कचरा बहा रहे है..?.. या फिर सिर्फ झगड़ा करने कि नियत से ऐसा किया जा रहा है,ऐसे में सवाल उठता है कि जब नालियों में कचरा बहाने से दूसरों को परेशानी होती है, तो संबंधित लोग इस आदत को छोड़ने के लिए गंभीरता क्यों नहीं दिखाते? सार्वजनिक व्यवस्था को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए आखिर कब जिम्मेदारी तय होगी?
क्या घरों के सामने नालियों में जाली लगाना होगा विकल्प?
इस समस्या से परेशान लोगों के बीच एक सुझाव यह भी सामने आ रहा है कि घरों के सामने नालियों पर ऐसी जाली लगाई जाए, जिससे पीछे से बहकर आने वाला ठोस कचरा आगे न जा सके और उसे निकालकर उचित स्थान पर निस्तारित किया जा सके।नाली मे जाली का उद्देश्य नाली को बंद करना नहीं, बल्कि उसमें बहकर आने वाले ठोस बदबूदार कचरे को रोकना है,ओर हर व्यक्ति को ये कदम उठाना चाहिये,
इसके साथ ही संबंधित विभाग को नालियों की नियमित सफाई सुनिश्चित करनी चाहिए और यदि कोई जानबूझकर नालियों में कचरा डालता पाया जाता है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
रोशनाबाद के इस मामले में भी जरूरत आरोप-प्रत्यारोप बढ़ाने की नहीं, बल्कि समस्या का स्थायी समाधान निकालने की है। स्थानीय लोगों, संबंधित विभाग और जिम्मेदार नागरिकों को मिलकर यह सुनिश्चित करना चाहिए कि नालियों में कचरा न बहाया जाए और किसी भी परिवार को गंदगी के कारण परेशानी न उठानी पड़े।
आखिर सवाल यही है—जब नालियां पानी की निकासी के लिए हैं, तो उनमें बदबूदार कचरा बहाकर समाज के लिए परेशानी क्यों खड़ी की जाए? और यदि कोई खुद को समाजसेवी बताता है, तो क्या उसकी पहली जिम्मेदारी समाज को स्वच्छ रखना नहीं होनी चाहिए?
