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रोशनाबाद एक ऐसा क्षेत्र है जहाँ बाहरी राज्यों के ऐसे न जाने कितने लोग आकर किराये पर निवास कर रहे है जिनके पीछे के इतिहास कों उठाकर यदि देखा जाये,तो न जाने उन पर कितने अपराधिक मामले निकलकर सामने आ सकते है,
लेकिन इस क्षेत्र मे आज अगर कोई बड़ी समस्या निकल कर सामने आ रही है तो वो है अवैध मेडिकलों पर काम कर रहे झोलाछाफ तत्व जो मेडिकलो कि आड़ मे बहुत से अपराधिक कार्यों कों अंजाम दें रहे है ,जो इन मेडिकलों पर मरीजों का इलाज ही नही कर रहे बल्कि उन दवाओं कि बिक्री भी कर रहे है जिन्हे स्वास्थ्य विभाग व कानून पूर्ण रूप से प्रतिबंधित कर चूका है,लेकिन इन दवाओं कि बिक्री कुछ इस शातिराना तरीके से कि जाती है कि बिना जाल बिछाए इन्हे पकड़ पाना मुमकिन नही,
रोशनाबाद क्षेत्र मे जगह जगह बैठे मौत के सौदागर,
रोशनाबाद कि हर गली हर मोहल्ले मे कहीं अवैध रूप से मेडिकल चलाये जा रहे है तो कहीं झोलाछाफ डॉक्टर मरीजों का इलाज कर रहे है,दुर्भाग्य कि बात ये है कि जिस क्षेत्र मे ये स्तिथि बनी हुई है रोशनाबाद का वो क्षेत्र हरिद्वार प्रसाशन से मात्र डेढ़ किमी कि दूरी पर ही है,बावजूद इसके यहाँ अवैध क्लिनिक,मेडिकल,झोलाछाफ स्वास्थ्य विभाग के सामने चुनौती पूर्वक डटे नजर आ रहे है,
हरिद्वार स्वास्थ्य विभाग कि एक मात्र महिला ड्रग इंस्पेक्टर संभाल रही है मोर्चा,जिनके ख़ौफ़ से अवैध मेडिकल,झोलाछाफ व क्लीनिको मे मच जाती है खलबली,

हालाकी लगातार शिकायतों के बाद स्वास्थ्य विभाग कि तेज तर्रार ड्रग इंस्पेक्टर अकेले ही मौर्चा संभाल रही है,कार्यक्षेत्र बड़ा होने के बाद भी जिम्मेदारी व ईमानदारी से अपनी ड्यूटी कों अंजाम दें रही है,स्वास्थ्य विभाग पर बहुत से सवाल खडे होते है जिनमे से एक यह भी है कि क्या स्वास्थ्य विभाग मे सिर्फ ओर एक मात्र ड्रग इंस्पेक्टर ही है? या अन्य भी कोई अधिकारी है जो मैदान मे उतारकर अवैध मेडिकल,क्लिनिक झोलाछाप डॉक्टर के खिलाफ कार्यवाही करने कि क्षमता रखता है,क्या जिले के बड़े स्वास्थ्य अधिकारियों कि कोई जिम्मेदारी नही? क्या बाकियों कों मालूम नही कि जिस कुर्सी पर बैठकर वे सरकार से फ्री कि तनख्वा वसूल रहे है उनकी कुर्सी के नीचे ही कहीं नशा बिक रहा है तो कहीं क्षेत्र मे अवैध व गैर कानूनी कार्य हो रहे है? फिर ऐसी कौन सी मजबुरी है कि एक अधिकारी कों छोड़कर बाकी सब कुर्सी पर आराम फरमा रहे है,
