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रोशनाबाद।अगर किसी गांव में विकास और स्वच्छता व्यवस्था की वास्तविक तस्वीर देखनी हो तो रोशनाबाद का दौरा किया जा सकता है। यहां जगह-जगह दिखाई देने वाली गंदगी, कूड़े के ढेर और बदहाल सफाई व्यवस्था ग्रामीण विकास के दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
स्थानीय स्तर पर सफाई व्यवस्था को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद कई स्थानों पर हालात जस के तस दिखाई देते हैं। सवाल यह है कि पंचायती विकास और स्वच्छता व्यवस्था के नाम पर सरकार द्वारा उपलब्ध कराई जाने वाली धनराशि का धरातल पर कितना उपयोग हो रहा है और उसका वास्तविक लाभ ग्रामीणों तक क्यों नहीं पहुंच रहा?
कागजों में विकास या जमीन पर हकीकत?
सरकार ग्रामीण क्षेत्रों के विकास, स्वच्छता और मूलभूत सुविधाओं के लिए विभिन्न योजनाओं के माध्यम से धनराशि उपलब्ध कराती है। ऐसे में यदि किसी गांव में नियमित सफाई व्यवस्था ही नजर नहीं आती, तो स्वाभाविक रूप से यह जानना जरूरी हो जाता है कि संबंधित मद में कितनी राशि स्वीकृत हुई, कितनी खर्च की गई और उसका उपयोग किन कार्यों में किया गया।यही वह बिंदु है जहां पारदर्शिता और जवाबदेही की जरूरत सबसे ज्यादा महसूस होती है।
कौन देखता है सफाई व्यवस्था?
रोशनाबाद में सफाई व्यवस्था की जिम्मेदारी किस संस्था या अधिकारी की है? कितने सफाईकर्मी तैनात हैं? उनकी उपस्थिति का रिकॉर्ड क्या है? सफाई के लिए कितनी धनराशि निर्धारित की गई और पिछले कुछ वर्षों में इस मद में कितना खर्च हुआ?
इन सभी सवालों का जवाब सार्वजनिक किया जाना जरूरी है।
यदि रिकॉर्ड में नियमित सफाई कार्य दिखाए जाते हैं, लेकिन मौके पर गंदगी के ढेर दिखाई देते हैं, तो रिकॉर्ड और जमीनी हकीकत का मिलान कराना बेहद जरूरी हो जाता है।
जांच हुई तो सामने आ सकता है सच, आखिर कितनी लम्बी हैं भ्रस्टाचारियों को ये चैन,
ग्रामीणों की शिकायतों और मौके की स्थिति को देखते हुए संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को रोशनाबाद का स्थलीय निरीक्षण करना चाहिए। साथ ही पंचायत से जुड़े विकास कार्यों, सफाई व्यवस्था, भुगतान, बिल-वाउचर और संबंधित अभिलेखों की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए।जांच का उद्देश्य किसी को दोषी ठहराना नहीं, बल्कि यह स्पष्ट करना होना चाहिए कि जनता के विकास के लिए निर्धारित धनराशि वास्तव में कहां और किस प्रकार खर्च हुई।
ग्रामीणों की चुप्पी भी बड़ा सवाल, आखिर क्यों नही उठाते आवाज?
सबसे बड़ा सवाल यह भी है कि यदि ग्रामीण लंबे समय से ऐसी समस्याओं का सामना कर रहे हैं तो उनकी शिकायतें जिम्मेदार अधिकारियों तक कितनी प्रभावी तरीके से पहुंच रही हैं? क्या शिकायतों पर कार्रवाई हुई? यदि हुई तो उसका परिणाम जमीन पर क्यों नजर नहीं आ रहा?अब जरूरत है कि संबंधित विभाग इस पूरे मामले का संज्ञान लेकर वास्तविक स्थिति सामने लाए।
आखिर पंचायती विकास और स्वच्छता के नाम पर आने वाली धनराशि का हिसाब क्या है?ओर कहाँ ठिकाने लगाई हैं राशि,
कितना पैसा आया और कहां खर्च हुआ?
कौन-कौन से विकास कार्य स्वीकृत हुए और कितने पूरे हुए?
सफाई व्यवस्था के लिए कितने कर्मचारी और कितना बजट निर्धारित है?और यदि बजट खर्च हुआ है तो रोशनाबाद की सड़कों और गलियों में गंदगी का यह आलम क्यों है?इन सवालों का जवाब दस्तावेजों और निष्पक्ष जांच के माध्यम से सामने आना चाहिए।
” रोशनाबाद के ग्रामीणों को भी अपने अधिकारों और गांव के विकास से जुड़े सरकारी रिकॉर्ड की जानकारी मांगने का पूरा अधिकार है। अब देखना होगा कि प्रशासन इन सवालों को गंभीरता से लेता है या फिर गंदगी और अव्यवस्था की यह तस्वीर यूं ही पंचायती विकास के दावों पर सवाल उठाती रहेगी।”
