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हरिद्वार। सिडकुल औद्योगिक क्षेत्र से सटे ग्राम रावली महदूद में इन दिनों कथित सट्टेबाजी के कारोबार को लेकर चर्चाएं तेज हैं। स्थानीय सूत्रों का दावा है कि क्षेत्र में लंबे समय से सट्टे का एक बड़ा नेटवर्क सक्रिय है और इस नेटवर्क में ‘प्यारे मोहन’ नाम का एक व्यक्ति कथित रूप से महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो सकी है।
सूत्रों के मुताबिक, शाम करीब पांच बजे के बाद कथित सट्टेबाजी का खेल तेज हो जाता है। आरोप है कि क्षेत्र में आने वाले युवाओं और अन्य लोगों को सट्टे में पैसा लगाने के लिए आकर्षित किया जाता है। शुरुआत में छोटी रकम से खेल शुरू कराने के बाद धीरे-धीरे बड़ी रकम लगाने के लिए उकसाए जाने की भी चर्चाएं हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि इन आरोपों में सच्चाई है तो मामला केवल अवैध सट्टेबाजी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर क्षेत्र के युवाओं और उनके परिवारों पर पड़ सकता है। दिनभर मेहनत करके कमाई करने वाले लोग यदि अपनी आय का हिस्सा सट्टे में गंवाने लगें तो इसका असर पूरे परिवार की आर्थिक स्थिति पर पड़ सकता है।
‘जान-पहचान के दम पर चल रहा कारोबार’ होने की चर्चा
क्षेत्रीय सूत्रों का यह भी दावा है कि कथित सट्टा कारोबार को कुछ लोगों की स्थानीय पहचान और पहुंच का लाभ मिल रहा है। आरोप है कि इसी वजह से यह गतिविधि लगातार बढ़ रही है। हालांकि, इन दावों की भी आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि रावली महदूद में बड़े स्तर पर सट्टेबाजी चल रही है तो आस पास के लोग आवाज क्यों नहीं उठा रहे ,
युवाओं के भविष्य पर गंभीर सवाल,
सट्टेबाजी का सबसे खतरनाक पहलू यह है कि इसकी गिरफ्त में आने वाला व्यक्ति अक्सर छोटी रकम से शुरुआत करता है और नुकसान की भरपाई के चक्कर में लगातार अधिक पैसा लगाने लगता है। यही स्थिति कई परिवारों के लिए आर्थिक संकट का कारण बन सकती है।
रावली महदूद जैसे तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्र में यदि वास्तव में सट्टेबाजी का कोई संगठित नेटवर्क सक्रिय है तो इसकी निष्पक्ष जांच बेहद जरूरी है। पुलिस को चाहिए कि सट्टा संचालकों, पैसों के लेन-देन और पूरे नेटवर्क की जांच कर सच्चाई सामने लाए।
फिलहाल ‘प्यारे मोहन’ को लेकर क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं हैं। क्या वह वास्तव में सट्टेबाजी के कथित नेटवर्क का मुख्य चेहरा है या फिर उसके नाम का इस्तेमाल किया जा रहा है? यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
अब निगाह पुलिस की कार्रवाई पर है। यदि आरोप निराधार हैं तो जांच से स्थिति साफ होनी चाहिए और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो कथित सट्टा नेटवर्क पर कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि क्षेत्र के युवाओं को जुए के इस कथित जाल से बचाया जा सके।
